IPS Puran Kumar Suicide Note- हरियाणा में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की आत्महत्या की दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश की नौकरशाही और राजनीति को हिलाकर रख दिया है। IGP रैंक के अधिकारी वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर की दोपहर अपने सरकारी आवास में अपने निजी थिएटर कक्ष में बैठकर खुद को गोली मार ली। घटनास्थल से मिले नौ पन्नों के एक पुरे सुसाइड नोट ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में गहरे पैठे जातिगत भेदभाव और कथित उत्पीड़न की पोल खोल दी है।
- IPS Puran Kumar के सुसाइड नोट में उजागर हुआ दर्द
- घटना से ठीक पहले IPS Puran Kumar पर दर्ज हुआ था मामला
- IPS Puran Kumar की पत्नी ने दर्ज कराई शिकायत, लगाए गंभीर आरोप
- हरियाणा में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज
- IPS Puran Kumar आत्महत्या मामले में गठित हुई विशेष जांच टीम
- प्रशासन में दरार, दलित अधिकारी उठा रहे आवाज
IPS Puran Kumar के सुसाइड नोट में उजागर हुआ दर्द
IPS Puran Kumar द्वारा छोड़े गए टाइप्ड नोट के अंतिम पन्ने पर हरे रंग की स्याही से उनके हस्ताक्षर और तारीख 7/10/2025 अंकित थी। इस दस्तावेज के प्रारंभिक आठ पन्नों में उन्होंने बारह वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के नाम दर्ज किए हैं, जबकि नौवें पन्ने पर उनकी व्यक्तिगत वसीयत लिखी हुई है। नोट में उन्होंने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर और रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया को सीधे तौर पर अपनी इस चरम घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इसके बाद राज्य सरकार ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से छुट्टी पर भेज भी दिया है।
अपनी आखिरी लिखित नोट में IPS Puran Kumar ने कहा, “मुझे एक झूठे मामले में फंसाकर मेरे सम्मान और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था। मैंने एसपी नरेंद्र बिजारणिया के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई, परंतु कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। जातिवाद, सामाजिक बहिष्कार और मानसिक यातनाओं से मैं पूरी तरह से तंग आ चुका हूं। अब मैं इस सबसे मुक्ति पाने का निर्णय ले रहा हूं।”
घटना से ठीक पहले IPS Puran Kumar पर दर्ज हुआ था मामला
IPS Puran Kumar की मौत से मात्र 24 घंटे पूर्व, 6 अक्टूबर को रोहतक के अर्बन एस्टेट पुलिस थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में एक शराब व्यापारी से ढाई लाख रुपए की मांगी गई राशि के आरोप में पूरन कुमार के पूर्व स्टाफ हेड कांस्टेबल सुशील कुमार को गिरफ्तार किया गया था। इसी एफआईआर में पूरन कुमार का नाम भी शामिल किया गया था। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने इस घटनाक्रम को अपने विरुद्ध चल रहे सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा बताया।
IPS Puran Kumar की पत्नी ने दर्ज कराई शिकायत, लगाए गंभीर आरोप
पूरन कुमार की पत्नी और हरियाणा कैडर की आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने चंडीगढ़ पुलिस में एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें सात गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने डीजीपी शत्रुजीत कपूर और एसपी नरेंद्र बिजारणिया पर अपने पति को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।
शिकायत में उल्लेखित मुख्य बिंदुओं के अनुसार:
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से पूरन कुमार का अपमान और मानसिक प्रताड़ना की गई।
जातिगत आधार पर उनके साथ स्पष्ट भेदभाव किया गया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।
रोहतक में उनके स्टाफ के विरुद्ध झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।
डीजीपी से शिकायत करने पर भी मामले को दबा दिया गया, और एसपी बिजारणिया उनकी फोन कॉल्स तक नहीं उठाते थे।
उन्हें एक मंदिर में प्रवेश से रोकते हुए कहा गया कि यह स्थान उनके लिए नहीं है।
अमनीत कुमार ने आगाह किया है कि यदि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे सबूतों को नष्ट और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
हरियाणा में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज
IPS Puran Kumar की आत्महत्या के बाद उत्पन्न हुई प्रतिक्रिया हरियाणा के इतिहास में अभूतपूर्व मानी जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्वयं पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय का आश्वासन दिया है। इसके परिणामस्वरूप ही आधिकारिक तौर पर मामला दर्ज हुआ है। एफआईआर में कुल 14 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिनमें डीजीपी शत्रुजीत कपूर, एसपी नरेंद्र बिजारणिया, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, और कई पूर्व डीजीपी एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सम्मिलित हैं।
IPS Puran Kumar आत्महत्या मामले में गठित हुई विशेष जांच टीम
चंडीगढ़ पुलिस ने आईजी पुष्पेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक छह सदस्यीय एसआईटी गठित की है। इस टीम में एसएसपी कंवरदीप कौर, एसपी केएम प्रियंका, डीएसपी चरणजीत सिंह विर्क, एसडीपीओ गुरजीत कौर और एसएचओ जयवीर सिंह राणा जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ओपी सिंह को राज्य का कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
प्रशासन में दरार, दलित अधिकारी उठा रहे आवाज
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद हरियाणा की नौकरशाही स्पष्ट रूप से दो खेमों में बंट गई प्रतीत होती है। दलित और पिछड़े वर्ग के अधिकारी सरकार के विरुद्ध खुलकर बोल रहे हैं। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डी सुरेश ने सार्वजनिक रूप से पूछा है कि जब एफआईआर दर्ज हो चुकी है, तो आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई? उन्होंने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित गिरफ्तारी आवश्यक है।
IPS Puran Kumar के आवास के बाहर राजनेताओं, सहयोगी अधिकारियों और दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। परिवार के सदस्यों ने 72 घंटे बीत जाने के बाद भी अंतिम संस्कार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है, जब तक कि उन्हें न्याय का पूरा भरोसा नहीं मिल जाता। यह घटना न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, और सरकारी तंत्र में व्याप्त जातिगत पूर्वाग्रहों के खिलाफ एक बड़ी चुनौती पेश करती है।



