Haryana Police Case ASI संदीप लाठर: दिवंगत ADGP पूरण कुमार के बाद हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ से सटे रोहतक शहर में एक ऐसी दुखद घटना हुई है, जिसने न सिर्फ एक परिवार को तोड़कर रख दिया, बल्कि प्रदेश के पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर सैल में तैनात ASI संदीप लाठर ने आत्महत्या का रास्ता चुना, लेकिन जाते-जाते वह एक ऐसा सच इस दुनिया में छोड़ गए, जिसने व्यवस्था के गलियारों में हलचल मचा दी है। उनके आरोपों ने एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या से लेकर उच्चस्तरीय रिश्तों तक के चौंकाने वाले ताने-बाने को भी उजागर किया है।
ASI संदीप लाठर ने एक सुसाइड नोट और वीडियो ने खोली पोल
मिडिया खबरों मुताबिक बयालीस वर्षीय संदीप लाठर मूल रूप से जींद जिले के जुलाना गांव के निवासी थे। एक संवेदनशील विभाग में तैनात इस पुलिसकर्मी ने आत्महत्याकरने से पूर्व चार पृष्ठों का एक सुसाइड नोट और छह मिनट अट्ठाईस सेकंड का एक वीडियो रिकॉर्ड किया। यही दस्तावेज अब मामले की सबसे बड़ी सबूत बन गए हैं। अपने सुसाइड नोट में संदीप ने दिवंगत
ADGP वाई पूरण कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूरण कुमार को भ्रष्ट बताते हुए आरोप लगाया कि रोहतक रेंज में उनके तबादले के बाद, भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को आईजी कार्यालय में तैनाती दिलाने जैसे कार्य किए जाते थे। यह नोट न सिर्फ एक व्यक्ति की व्यथा-कथा है, बल्कि तंत्र के एक काले चेहरे को दर्शाता प्रतीत होता है।
ASI संदीप लाठर के वीडियो संदेश में दिखा देशभक्ति और निराशा का द्वंद्व
संदीप लाठर द्वारा छोड़े गए वीडियो संदेश ने इस मामले को और भी अधिक मार्मिक बना दिया है। इस वीडियो में उन्होंने क्रांतिकारी भगत सिंह का जिक्र करते हुए कहा, “आज भगत सिंह जिंदा होते तो उन्हें शर्म आती कि हम किन लोगों के लिए लड़े।” उन्होंने खुद को भगत सिंह का प्रशंसक और एक सक्षम जमींदार का बेटा बताया। उनके शब्दों में एक अजीब विरोधाभास था – एक तरफ ईमानदारी की लड़ाई में अपनी कुर्बानी देने पर गर्व, तो दूसरी तरफ व्यवस्था से उपजी गहरी निराशा। “अलविदा दोस्तों, अगले जन्म में आएंगे तब भी ऐसी ही लड़ाई लड़ेंगे,” – यह उनका अंतिम संदेश था, जो एक सिस्टम के खिलाफ उनकी लड़ाई को दर्शाता है।
ASI संदीप लाठर के परिवार की पीड़ा और मांगें
इस त्रासदी ने ASI संदीप लाठर की पत्नी संतोष और उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है। दुःख की इस घड़ी में भी, परिवार को न्याय की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। बुधवार की सुबह, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उन्हें सांत्वना देने पहुंचे, तो परिवार ने त्वरित कार्रवाई की मांग की। इसके बाद शाम करीब चार बजे मुख्यमंत्री के ओएसडी एफआईआर की कॉपी लेकर परिजनों के पास पहुंचे।
हालाँकि, परिवार की मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। वे ASI संदीप लाठर को शहीद का दर्जा, उनकी पत्नी संतोष को सरकारी नौकरी और परिवार के भविष्य के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद का लिखित आश्वासन चाहते हैं। यह मामला अब सिर्फ एक आत्महत्याकेस नहीं रह गया है, बल्कि एक ईमानदार अधिकारी के परिवार के संघर्ष की कहानी बन चुका है।
ASI संदीप लाठर और ips पूरण कुमार की आत्महत्या से एक सिस्टम पर सवाल
एडीजीपी पूरण कुमार की आत्महत्या के ठीक आठ दिन बाद ASI संदीप लाठर की आत्महत्याने एक गहरे संकट की ओर इशारा किया है। संदीप लाठर के आरोप, चाहे वे सही साबित हों या न हों, पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में मौजूद कथित दबावों और भ्रष्टाचार की एक झलक दिखाते हैं।
यह मामला सवाल उठाता है कि क्या हमारी व्यवस्था उन लोगों को संरक्षण दे पा रही है जो ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाना चाहते हैं? ASI संदीप लाठर की मौत केवल एक आंकड़ा नहीं है; यह एक चेतावनी है कि तंत्र के भीतर की विषमताओं को दूर किए बिना ऐसी त्रासदियाँ रुकने वाली नहीं हैं। राज्य सरकार और पुलिस प्रमुखों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती न सिर्फ इस मामले की निष्पक्ष जांच कराना है, बल्कि पुलिस बल के भीतर के मनोबल और कार्य करने की स्थितियों पर गंभीरता से विचार करना भी है।



