फरीदाबाद हरियाणा हलचल डेस्क- हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने फरीदाबाद के थाना धौज में तैनात पुलिस सब-इंस्पेक्टर सुमित कुमार को ₹1.5 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। अंबाला यूनिट की टीम ने शिकायतकर्ता की शिकायत पर ‘ट्रैप’ सेट कर आरोपी को यश फार्म हाउस क्षेत्र में दबोचा। घटना के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7A और बीएन एक्ट की धारा 308(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
धोखाधड़ी केस में चार्जशीट देने के बदले मांगी घूस
शिकायतकर्ता पर थाना धौज में 8 सितंबर 2025 को धारा 318(बी) पीएनएस के तहत फ्रॉड का मुकदमा दर्ज है। जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर सुमित कुमार ने चार्जशीट कोर्ट में पेश करने के बदले ₹1.5 लाख की मांग की। पीड़ित ने रिश्वत की मांच से तंग आकर सीधे ACB,अंबाला को लिखित शिकायत भेजी। अधिकारियों ने प्राथमिक सत्यापन में शिकायत को सही पाया और ट्रैप टीम गठित की।
ACB ने बनाया ट्रैप: फार्म हाउस के पास दबोचा
5 दिसंबर की दोपहर करीब 12:30 बजे शिकायतकर्ता को यश फार्म हाउस, थाना धौज रोड पर बुलाया गया। आरोपी सब-इंस्पेक्टर ने ₹1.5 लाख नकद लेते ही ACB की टीम को देखकर घबराया, मगर मौके से भाग नहीं सका। टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर नोटों की गिनती की और वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। एसीबी के अधीक्षक संदीप सिंह ने बताया, “नकदी को जब्त कर फॉरेंसिक बैग में सील किया गया। आरोपी का मोबाइल और बैग भी कब्जे में लिया गया है ताकि बैंक ट्रांजेक्शन और पिछले रिश्वत लेन-देन की जांच हो सके।”
आरोपी का सेवा इतिहास और पूर्व शिकायतें
32 वर्षीय सुमित कुमार 2017 बैच के SI है और पिछले आठ महीने से थाना धौज में तैनात हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक उनके खिलाफ 2022 में भी एक रिश्वत शिकायत आई थी, पर तब सबूत अपर्याप्त होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई थी। वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “वह अक्सर केस निपटाने के बदले ‘सेटलमेंट’ की बात करता था। इस बार पकड़े जाने से विभाग में हड़कंप है।” जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने हाल ही में फरीदाबाद के सेक्टर-21 में एक फ्लैट खरीदा है, जिसकी रजिस्ट्री रकम से कहीं अधिक बाजार मूल्य है।
कानूनी कार्रवाई और भविष्य की जांच
ACB गिरफ्तारी के बाद आरोपी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। एसीबी ने IPC की धारा 161 (रिश्वत लेना), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (सरकारी कर्मचारी द्वारा अवैध लाभ) और धारा 7A (कनेक्टेड लेन-देन) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अगर दोष सिद्ध होता है तो SI को न्यूनतम तीन साल की सजा हो सकती है और सेवा से बर्खास्तगी भी तय है। कोर्ट ने आरोपी को 7 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है ताकि जांच एजेंसी बैंक खातों और संपत्ति की विस्तृत जांच कर सके।
ACB का संदेश भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
हरियाणा के DG सतर्कता विभाग ने बयान जारी कर कहा, “यह कार्रवायी यह दिखाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। कोई भी अधिकारी चाहे वह किसी भी रैंक का हो, कानून से ऊपर नहीं है।” पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के SSP को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने थानों में कामकाज की निगरानी बढ़ाएं और किसी भी प्रकार की रिश्वत मांगने वाली शिकायत तुरंत एसीबी को भेजें।
फरीदाबाद की इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित किया है कि जब तक जनता सामने आकर शिकायत दर्ज नहीं करती, तब तक भ्रष्टाचार की गंगा बहती रहती है। ACB की सक्रियता और पीड़ित की हिम्मत ने एक बेईमान अधिकारी को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। सरकार का संदेश साफ है—चाहे वर्दी कोई भी हो, कानून सबके लिए एक जैसा है।



