New Baggage Rules: New Baggage Rules के तहत भारत सरकार ने विदेश से लौटने वाले यात्रियों द्वारा लाए जाने वाले सोने के आभूषणों के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ‘बैगेज रूल्स, 2026’ के तहत, अब महिला एवं पुरुष यात्रियों के लिए आभूषणों की ड्यूटी-फ्री सीमा उनकी कीमत के बजाय उनके वजन के आधार पर तय की जाएगी। यह निर्णय विशेष रूप से दुबई जैसे ‘गोल्ड हब’ से लौटने वाले अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के यात्रियों के लिए एक स्पष्ट और सुविधाजनक व्यवस्था (New Baggage Rules) लेकर आया है।
New Baggage Rules के मुख्य बिंदु
वैल्यू कैप की समाप्ति: पहले लागू आभूषणों की कुल कीमत पर आधारित ड्यूटी-फ्री सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
वजन आधारित सीमा: अब ड्यूटी-फ्री लाने की अनुमति वजन पर आधारित है:
महिला यात्री: अधिकतम 40 ग्राम सोने के आभूषण।
पुरुष यात्री: अधिकतम 20 ग्राम सोने के आभूषण।
योग्यता शर्त: यह रियायत केवल उन यात्रियों के लिए है, जिन्होंने भारत लौटने से पहले विदेश में एक वर्ष या उससे अधिक का समय बिताया हो। अल्पकालिक यात्रा पर जाने वालों पर यह लागू नहीं होगी।
केवल पर्सनल ज्वेलरी: यह छूट केवल पहनने वाले आभूषणों (ज्वेलरी) तक सीमित है। सोने के बार, सिक्के, वर्की (बुलियन) या चांदी इस ड्यूटी-फ्री सीमा में शामिल नहीं हैं। उन पर अलग से शुल्क और घोषणा के नियम लागू होंगे।
New Baggage Rules का प्रभाव व लाभ
इस सुधार से कस्टम विवादों में कमी आने की उम्मीद है। पहले, यात्रियों और अधिकारियों के बीच आभूषणों के मूल्यांकन, बिल की वैधता और सीमा से अधिक होने पर अक्सर विवाद होता था। नए वजन-आधारित नियम से यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, त्वरित और निष्पक्ष होगी। यह दुबई जैसे स्थानों से डिजाइनर व महंगे आभूषण लाने वालों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि अब महज उच्च कीमत के कारण अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
New Baggage Rules की आवश्यक सावधानियाँ
यात्रियों के लिए यह जांचना अनिवार्य है कि उनके आभूषण तय वजन सीमा के भीतर हैं। यदि सीमा से अधिक है, तो अतिरिक्त वजन पर लागू शुल्क का भुगतान करने के लिए पूर्व घोषणा करनी होगी। बिना घोषणा किए आभूषण लाने पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि लाई जा रही वस्तु वास्तव में पहनने का आभूषण ही है, न कि कोई अन्य स्वरूप।
केंद्र सरकार का यह कदम अंतरराष्ट्रीय यात्रा और खरीदारी के बदलते चलन के अनुरूप है। यह नया, सरलीकृत ढांचा यात्रियों को निश्चितता प्रदान करेगा और भारत लौट रहे एनआरआई समुदाय के लिए एक बड़ी राहत का काम करेगा। अब यात्रियों के लिए केवल ‘वजन’ ही मायने रखेगा, ‘मूल्य’ नहीं।


