FASTag Toll Tax, नई दिल्ली। भारत में सड़क परिवहन व्यवस्था लगातार आधुनिक हो रही है और इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल राजस्व में देखने को मिल रहा है। आईसीआरए एनालिटिक्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2024 के बीच देश का टोल राजस्व 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹49,193 करोड़ तक पहुंच गया। यह आंकड़ा न केवल सड़क परिवहन की बढ़ती मांग को दर्शाता है, बल्कि डिजिटल टोल कलेक्शन प्रणाली की सफलता का भी प्रमाण है।
बढ़ता ट्रैफिक और टोल लेनदेन
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि में टोल भुगतान करने वाले वाहनों की संख्या में लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। टोल योग्य ट्रैफिक वॉल्यूम 26,864 लाख लेनदेन तक पहुंच गया, जो यह संकेत देता है कि सड़क मार्ग से यात्रा और माल ढुलाई दोनों में पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय तेजी आई है। बढ़ते ट्रैफिक वॉल्यूम और हर साल संशोधित होने वाली टोल दरों ने राजस्व में इस वृद्धि को और मजबूती दी है।
FASTag से बढ़ी पारदर्शिता और दक्षता
FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम ने देशभर में टोल भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। इस प्रणाली ने टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को कम किया और नकद लेनदेन पर निर्भरता घटाई। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन ₹57,940 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कुल टोल लेनदेन की संख्या 2023 के 30,383 लाख से बढ़कर 2024 में 32,515 लाख हो गई, यानी 7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि। यह बदलाव देश में डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता और सुविधा का स्पष्ट संकेत है।
FASTag क्षेत्रवार योगदान
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में टोल राजस्व का वितरण भी दिलचस्प है। पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र मिलकर देश के कुल टोल राजस्व में 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं। पश्चिम भारत लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, जबकि दक्षिण भारत 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। उत्तर भारत की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत है, वहीं पूर्वी और मध्य भारत मिलकर करीब 25 प्रतिशत योगदान देते हैं। यह संतुलित वितरण दर्शाता है कि देशभर में सड़क परिवहन और टोल संग्रहण का दायरा व्यापक और विविध है।
माल ढुलाई और यात्री वाहनों का अनुपात
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूर्व, मध्य और पश्चिम भारत में माल परिवहन गतिविधियां अधिक हैं। इन क्षेत्रों में कॉमर्शियल वाहनों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। दूसरी ओर, उत्तर और दक्षिण भारत में यात्री वाहन प्रमुख हैं, जहां कार और जीप जैसी गाड़ियों की हिस्सेदारी 65 से 70 प्रतिशत तक रहती है। मध्य भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग—एनएच-44, एनएच-47 और एनएच-52—लंबी दूरी के माल परिवहन और इंटर-सिटी ट्रैफिक दोनों के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं।
टोल कलेक्शन को लेकर भविष्य की संभावनाएं
टोल राजस्व में आई यह तेज वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारत में सड़क परिवहन, लॉजिस्टिक्स, व्यापार और यात्रा के सभी क्षेत्रों में निरंतर मजबूती बनी हुई है। हाईवे नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल टोल सिस्टम का व्यापक उपयोग आने वाले समय में इस वृद्धि को और गति देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो अगले कुछ वर्षों में भारत का टोल राजस्व वैश्विक स्तर पर भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन ने न केवल टोल भुगतान को सरल और पारदर्शी बनाया है, बल्कि देश के राजस्व ढांचे को भी मजबूत किया है। बढ़ते ट्रैफिक और डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता ने भारत को सड़क परिवहन के क्षेत्र में एक नई दिशा दी है। आने वाले वर्षों में यह प्रणाली न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी। इस तरह, टोल राजस्व में हो रही यह वृद्धि भारत की प्रगति और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।



