Sarso Bhav Today: उत्तर भारत की प्रमुख मंडियों में सरसों के भाव ने मंगलवार को एक स्थिर परंतु मिली-जुली तस्वीर पेश की। जहां कुछ मंडियों में नाममात्र की तेजी दर्ज की गई, वहीं अधिकांश केंद्रों पर मंदी का रुख देखा गया। इस उतार-चढ़ाव के बीच किसानों और व्यापारियों का ध्यान मांग और आवक (सप्लाई) के सूक्ष्म संतुलन पर टिका हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नई फसल की आहट और मौजूदा भंडार की गतिविधियां भाव निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
प्रमुख मंडियों में क्या रहे भाव Sarso Bhav?
राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में भावों में गिरावट का प्रमुख रुझान देखा गया। कोटा मंडी में सरसों के दाम 50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट के साथ 7,650 रुपये पर पहुंच गए। वहीं, अलवर में 25 रुपये की मंदी के बाद भाव 7,700 रुपये दर्ज किया गया। आगरा क्षेत्र के शमसाबाद और दिग्नेर जैसे प्लांट भाव भी 25 रुपये की कमी के साथ 7,750 रुपये पर बने रहे।
दिल्ली की मंडी में सरसों का भाव 6,950 से 6,975 रुपये प्रति क्विंटल के बीच स्थिरता दिखाई दी। हालांकि, जयपुर मंडी ने 25 रुपये की मामूली तेजी दर्ज करते हुए 7,150 से 7,175 रुपये का स्तर छुआ। गुजरात की मंडियों में, पाटन में भाव 1,280 से 1,319 रुपये प्रति 20 किलोग्राम रहा, जबकि दीसे जैसे अन्य केंद्रों पर कीमतें 1,250 से 1,270 रुपये के दायरे में निहित थीं।
Sarso तेल और खल के दामों में भी अस्थिरता
सरसों से जुड़े उत्पादों के बाजार में भी समान अस्थिरता देखी गई। मुरैना मंडी में, कच्ची घानी का तेल और एक्सपेलर तेल दोनों ही 10-10 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट के साथ क्रमशः 1,430 और 1,420 रुपये पर ट्रेड हुए। वहीं, सरसों की खल (केक) के भाव में भी 20 रुपये की कमी आई, जो 2,800 रुपये पर बंद हुई। दिल्ली में एक्सपेलर तेल 1,425 रुपये और चरखी दादरी में 1,410 रुपये पर बना रहा। हालांकि, जयपुर में खल के भाव में 10 रुपये की तेजी ने कुछ सकारात्मक संकेत दिए। इससे स्पष्ट है कि प्राथमिक और सह-उत्पादों के बाजार एक-दूसरे से निकटता से जुड़े हुए हैं।
Sarso Bhav आवक और कॉर्पोरेट खरीद का असर
विभिन्न मंडियों में आवक के स्तर ने स्थानीय भावों को प्रभावित किया। मुरैना में 500 बोरी और अलवर में 4,000 बोरी की आवक ने इन केंद्रों पर मंदी के दबाव को बनाए रखने में भूमिका निभाई। वहीं, बड़े कॉर्पोरेट खिलाड़ियों के मूल्य निर्धारण ने बाजार के मूड को दिशा दी। पतंजलि फूड्स ने बारां और श्रीगंगानगर में अपने भाव में 50-50 रुपये की कटौती की। इसी तरह, आदानी ग्रुप के बूंदी, अलवर और गोहाना प्लांट के भाव में 25-25 रुपये की गिरावट देखी गई। यह संकेत है कि प्रमुख खरीदार वर्तमान में कम कीमतों पर ही सौदेबाजी करने पर तुले हुए हैं।
मौजूदा बाजार की गतिशीलता बताती है कि सरसों के भाव एक संक्रमणकालीन दौर से गुजर रहे हैं। निकट भविष्य में, नई फसल के आगमन की संभावनाएं, सरकारी खरीद नीतियां और घरेलू तेल की मांग में होने वाले बदलाव बाजार के रुख को तय करेंगे। कृषि विश्लेषकों का सुझाव है कि किसानों को भंडारण सुविधाओं का उपयोग करते हुए उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए रणनीतिक रूप से बिक्री करनी चाहिए। व्यापारियों के लिए, बाजार की निचली स्तरों पर होने वाली खरीदारी में सतर्कता बरतना ही लाभदायक रहने वाला है। अगले कुछ सप्ताह मौसम और बड़े खरीदारों की गतिविधियों पर निर्भर करेंगे, जो इस रबी सीजन के इस प्रमुख तिलहन की कीमत तय करेंगे।



